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एकसौ सात करोड रू. का टेंडर हुवा मॅनेज स्थानिक श्रमिक बना गुजरात कंपनी का मालक

 एकसौ सात करोड रू. का टेंडर हुवा मॅनेज स्थानिक श्रमिक बना गुजरात कंपनी का मालक

महा घडामोडी न्यूज प्रतिनिधी, नावेद खान, ब्रम्हपुरी : शहरी विकास मंत्रालय, महाराष्ट्र सरकारने दिनांक १६/०३/२०२४ को नगर परिषद ब्रम्हपुरी को नगरोत्थान महाअभियान ब्रम्हपुरी शहर भुमिगत गडरलाईन प्रोजेक्ट हेतू १२९ (एकसो उन्नतीस) करोड रूपयोका निधी मंजूर कतरेहूवे इस काम को प्रशासकीय मंजुरी प्रदान की. साथ ही इस काम के टेंडर को ७ दिन के अंदर कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिये. मात्र स्थानिक प्रशासनने इस काम के शुरूवात मे ही बहोत समय गवा दिया. माना जारहा की ये वो समय जो टेंडर सेटिंग के चक्कर मे लगाया गया.

यूँ तो १ लाख और ५ लाख के निधी के काम हेतू ठेकेदारोंकी कतार लगती है और भारी मात्रा मे स्पर्धा होती है. नगर परिषद ब्रम्हपुरी ने इस गडर लाईन के काम को ऑनलाईन टेंडर व्दारा निविदा दिनांक १७/०८/२०२४ से शुरू करके ऑनलाईन निविदा प्राप्त करने की अंतिम तिथी ०९/०९/२०२४ तक रखी गयी थी. मात्र इस मामलेमे जानबुझकर राष्ट्रीय स्तर के किसी बडे हिंदी दैनिक को जानकारी नहीं दि गयी और केवल जिल्हा स्तरी, राज्यस्तरी व एक राष्ट्रीय स्तरीय इंग्लीश दैनीक में विज्ञापन दिया गया. १२९ (एकसो उन्नतीस) करोड के इस ठेके मे बडे पैमानेमे अनियमितता व भ्रष्टाचार हाणे की सुरवातसे संभावना की जारही थी.

इस बड़े शहर के भुमिगत गडर लाईन प्रोजेक्ट काम हेतू कुल ३ टेंडर प्राप्त हुवे और वे ३ टेंडर गुजरात के सुरत, अहमदाबाद, मेहताना शहरो से प्राप्त हुवे थे और इसमे अहमदाबद के एन.आर.ई.पि.सी.प्रायवेट लिमीटेड कंम्पनी को आश्चर्यकारक तौर पे वर्क ऑडर/कार्यारंभ आदेश और काम का अॅग्रीमेंट आनंद फानन मे एक ही दिन मे दिया गया है. इस मामले में जो दस्तावेज तक्रारकर्ता को प्राप्त हूवे. इस प्रकार उपरोक्त कंम्पनी को दिनांक ०९/१०/२०२४ को १०७ करोड काम का कार्यारंभ आदेश दे दिया गया.

उपरोक्त टेंडर प्रक्रिया के संबंध में नगर परिषद ब्रम्हपुरी के पुर्व पार्षद अॅड.दिपक शुक्ला, आरोग्य सभापती ने इस निविदा प्रक्रिया के दस्तावेजो को नगर परिषद से प्राप्त करते हुवे ये दावा किया है की, इतने बड़े काम के टेंडर प्रोसेस के दरम्यान गुजरात के एन.पी.पटेल, एन.आर.ई.पी.सी. किंपनी और जयंती सुपर प्रायवेट लिमीटेड कंम्पनी ने आपस में नगर परिषद प्रशासन के साथ साठ-गाठ करते हुवे जाली दस्ताऐवजो को सरकारी काम में उपयोग करके इस टेंडर को गैरकानुनी ढंग से प्राप्त किया है और इस संदर्भ में दिनांक १०/१२/२०२४ को मुख्याधिकारी ब्रम्हपुरी तथा अंतमे पुलीस स्टेशन ब्रम्हपुरी को इस मामले मे गुन्हा दर्ज होने हेतू दिनांक २०/०१/२०२५ को रिपोर्ट दर्ज की गयी है, मामले की जांच चालू है.

मामले को उठाणे वाले पुर्व पार्षद अॅड. दिपक शुक्ला ने पुलीस थाने दिगयी रिपोर्ट में दावा किया है की. इस १०७ करोड रूपये का टेंडर को प्राप्त करने हेतू जो कॉलीफिकेशन क्रायटेरीया और योग्यताऐ रखी गयी थी उसमे प्रमुख योग्यता ये बताई गयी थी की, टेंडर में हिस्सा लेनेवाले ठेकेदार कम्पनी को टेंडर भरने के पुर्व कार्यस्थल ब्रम्हपुरी मे भेट देना और कार्यस्थल की परिस्थितीसे खुद को अवगत करा लेना तथा कार्यस्थल के स्थान से जिओ टॅग फोटो ऑनलाईनसे निकालकर जिओटॅग फोटो ऑनलाईन टेंडर भरते हुवे फोटो को टेंडर काम के साथ ऑनलाईन डालना अनिवार्य होगा और इसके बगैर टेंडर मार्फ स्विकृत नही होगा. साथ ही जिओटॅग फोटो लेनेवाले बिल्डर/मालीक/कानुनन प्रतिनिधी को लि गये जिओटॅग फोटो के संबंध में स्वंयघोषणापत्र खुद के व्दारा खुद के हस्ताक्षर से ऑनलाईनव्दारा टेंडर फार्म के साथ भरना भी अनिवार्य बताया गया था. 

किंतु इस टेंडर प्रक्रिया में ऐसा न होते हुवे एक स्थानिक श्रमीक नंदू धोटे को जयंती सुपर ए क्लास कंपनी का प्राधिकृत प्रतिनिधी बताते हुवे उसका जियोटॅग फोटो तथा उक्त श्रमिक का जाली हस्ताक्षर करा हूवा उसके नाम का जाली स्वयंघोषणापत्र गुजरात से टेंडर फार्म भरते समय प्रस्तुत किया गया है. इसीकेसाथ एक अन्य व्यक्ती को भी इसीप्रकारसे एन.पि. पटेल कम्पनी का प्राधिकृत प्रतिनिधी बताते हूवे उसके भी नाम का स्वयंमघोषणापत्र उसकी भी जाली हस्ताक्षर के साथ एन.पि. पटेल कंम्पनी ने गुजरात से टेंडर फार्म भरते हुवे दाखील किया. इसप्रकार जालसाजी करके और झुटे दस्तावेज तयार करके १०७ करोड रूपयोंका टेंडर एन.आर.इ.पि.सी. कंम्पनी गुजरात को मिलने मे साठगाठ करके गैरकानुनी तरीकेसे मदत कि गयी है. महत्वपूर्ण बात ये है की एन.पि. पटेल और जयंती सुपर कंम्पनी ने दाखील किये टेंडर फार्म के साथ जाली दस्ताऐवज दाखील करनेपर भी उनके टेंडर फार्म को नगरपरिषद के अकाउंटंड, विभाग प्रमुख, इंजिनिअर और मुख्याधीकारी और प्रोजेक्ट मॅनेजमेंट डायरेक्टर ने अत्यंत आश्चर्यकारक योग्य ठहराया है. 

इसप्रकार टेक्निकल बिड पे जांच मे अपात्र कंपनीको पात्र बताते हूवे और टेंडरोकी संख्या तिन बताते हुवे एन.आर.इ.पि.सी. गुजरात कंम्पनी को १०७ करोड रूपये का टेंडर पुरीतरहसे गैरकानुनी तौर पे सी.एस.आर. रेट से मिला दिया गया और सरकार और नगरपरिषद का इसमामले मे कमसे कम १० से १२ करोड रूपये का नुकसान किया गया है. और इसकेलीये जालसाझी करने वाले और उनको सहकार्य करनेवाले सभी अधिकारी जिम्मेदार है. इस टेंडरसे किसको आर्थीक फायदा और खुशी पोहचाई गई है ये जांच का विषय है. इस टेंडर को अपराधीक सेटींग/रिंग करके मिलाया गया है. इसका सबसे बड़ा प्रमाण व साक्ष येभी है की केवल ६ से ७ सेकंद के अंतराल मे तिन अलग-अलग कंम्पनी एक दिन, एक साथ, एक समय, एकही जगहपर कैसे जिओटॅग फोटो निकाल सकते है. ये तभी संभव हो सकता है जब कंपनी मे आपसी संगणमत हो और निकाली गयी सभी कंपनीओके जियोटॅग फोटो एक ही कॅमेरेसे और एकही ऍपसे कैसे निकाल सकते है. ऐ सभी सत्य १०७ करोड रूपयेका टेंडर आपराधीक तरीकेसे मॅनेज किया गया है यही बात साबीत कर रहे है.

इस टेंडर प्रक्रियामे लगाये गये झुटे दस्तावेज और उसका सरकारी काम मे गैरकानुन उपयोग यह यह साफतौरपे अपराध होणेके कारण उक्त तिनो कंम्पनी के विरूध्द और इसमे दिये गये अधिकारीयों के खिलाफ दि. २०/०१/२०२५ को पुर्व पार्षद अॅड. दिपक शुक्ला ने पुलिस स्टेशन ब्रम्हपुरी इस मामले मे प्रथम सूचना दि है. साथ ही जिल्हा चंद्रपूर के जिल्हा पुलीस अधिक्षक और जिल्हा कलेक्टर को मामला पहुंचागया है. इस संदर्भ मे मुख्याधिकारीने दो जांच का हवाला दिया है और इसपे नई जाच बैठाई गयी है. जिसमे लिपापोती होणे की पुर्ण गुंजाइश है. तक्रारकर्ता पुर्व पार्षद ने मामले को जल्द हायकोर्ट पुहचनेका मानस जताया है. उक्त प्रकरण मे नगरपरिषद प्रशासन की साख पुर्णतः मलीन हो गई है. इस टेंडर में करोडो का फायदा किसको पहुचा जनता जनना चाहती है.



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